उपायुक्त, न.वि.स., पटना संभाग  द्वारा विद्यालय भ्रमण के दौरान दिये गये निर्देश।उपायुक्त, न.वि.स., पटना संभाग  द्वारा ज. न. वि., वैशाली के भ्रमण के दौरान दिये गये निर्देश। संविदा के आधार पर भर्ती हेतु सुचना – न. वि. स. शिलांग संभाग के लिए I उपायुक्त, न.वि.स., पटना संभाग  द्वारा ज. न. वि., लोहरदगा के भ्रमण के दौरान दिये गये निर्देश। उपायुक्त, न.वि.स., पटना संभाग  द्वारा ज. न. वि. - I, गया के भ्रमण के दौरान दिये गये निर्देश।  उपायुक्त, न.वि.स., पटना संभाग  द्वारा ज. न. वि., चतरा के भ्रमण के दौरान दिये गये निर्देश।  अभिभावकों से धनराशि की उगाही न करने के संबंध में I विभिन्न पदों पर नियुक्ति हेतु सूचना । मैदानी क्षेत्र के भीतर शिक्षकों के हस्तांतरण के संबंध में। आयुक्त, न. वि. स. को सीधे प्रतिवेदन नहीं देने के संबंध में। उपायुक्त, न.वि.स., पटना संभाग  द्वारा दिये गये निर्देश - 04.09.2016।प्राचार्य/क्लस्टर प्रभारी सहायक आयुक्त/अधिशासी अभियंता के स्तर से कार्रवाई अपेक्षित। उपायुक्त, न.वि.स., पटना संभाग  द्वारा विद्यालय भ्रमण के दौरान दिये गये निर्देश।उपायुक्त, न.वि.स., पटना संभाग  द्वारा दिये गये निर्देश।एन.वी.एस. कर्मचारियों के लिए आयुक्त, न.वि.स से मिलने का समय ।रिक्त पदो की स्थिति दिनांक 25.05.2016 तक
 
शिक्षा के अधिकार अधिनियम
बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मिलने के अधिकार के नियम को 01 अप्रैल 2010 से लागू हुआ। यह भारतीय जनता के लिए ऐतिहासिक दिवस है जैसा कि भारतीय जनता को इस दिन से भारतीय संविधान की धारा 21 ए के तहत शिक्षा का संवैधानिक अधिकार प्राप्त हुआ। छः से चैदह वर्ष के आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चें को आठ वर्ष तक मुफ्त प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी उसके पड़ोस के केन्द्र में।

किसी भी कीमत पर बच्चों को आठ वर्ष की स्कूली शिक्षा देने, स्कूल में दाखिला, उनकी उपस्थिति सुनिष्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेवारी होगी। किसी भी बच्चें को दस्तावेज के आभाव में दाखिला से वंचित नही किया जा सकता है। किसी बच्चें का नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस नही किया जाएगा और न ही किसी बच्चें को नामांकन जाॅच हेतु कहा जाएगा। अक्षम (विकलांग) बच्चें को भी मुख्य धारा के स्कूलों में शिक्षित किया जाएगा। डाॅ0 मनमोहन सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा है कि देष के लिए यह महत्वपूर्ण है कि अगर हमलोग बच्चों और युवा लोगो को शिक्षित करे तो देष का भविष्य मजबूत एवं समृद्ध होना सुनिष्चित हैं।
"सभी निजी विद्यालयों में समाज के कमजोर वर्ग एवं लाभ से वंचित समुदाय का 25 प्रतिषत नामांकन आने वाले वर्ष के कक्षा छः में साधारण नामांकन विधि द्वारा किया जाएगा। इस कोटे का कोई भी स्थान खाली नही रखा जा सकता है। इन बच्चों के साथ वही व्यवहार किया जाएगा जो अन्य बच्चों के साथ किया जाता है और सरकारी स्कूल की तरह कम से कम दर पर षिक्षा दी जाएगी(बष्र्ते निजी विद्यालय में एक बच्चें का खर्च कम हो)। "

सभी विद्यालय के पास निर्धारित धारा पाॅच(2) के अनुसार एवं वैसे विद्यालय जो निर्धारित मानदंड 03 वर्ष में पूरा नहीं करता है उसे संचालित करने की अनुमति नही दी जायेगी। सभी निजी विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने हेतु आवेदन करना होगा जो इसमें असफल होते हैं, उन्हे रूपया 01लाख अर्थ दण्ड देना होगा और अगर वे संचालन जारी रखते हेै तो उन्हे प्रत्येक दिन का रूपया 10 हजार दण्ड के रूप मे देना होगा। षिक्षकों के मानक, शैक्षणिक योग्यता एवं प्रषिक्षण के नियमों को विद्यालय प्राधिकार को अनिवार्य करना होगा। सभी विद्यालय के षिक्षकों को पाॅच वर्ष के अन्दर नियमों का अनुकरण करना होगा।
षिक्षा प्राप्ति के अधिकार अधिनियम-2009
बच्चों के अधिकार की रक्षा का राष्ट्रीय आयोग अनिवार्य रूप से निगरानी करता है इस ऐतिहासिक अधिकार को लागू कराने हेतु एक विषेष प्रभाग राष्ट्रीय आयोग की आगामी वर्ष एवं महीने में इस विषाल एवं महत्वपूर्ण कार्य को करने के लिए कृत संकल्प है। राष्ट्रीय अधिकार सुरक्षा आयोग द्वारा षिकायत दर्ज करने हेतु एक मुफ्त हेल्प लाईन स्थापित किया जायेगा। आयोग इस नियम के औपचारिक अधिसूचना का स्वागत करता है और इसकी सफलतापूर्वक लागू कराने हेतु आष्वस्त करता है।

बच्चों के अधिकार की सुरक्षा आयोग सभी समूह के नागरिक समाज, विद्यालयों, षिक्षकों, शासकों, कलाकारों, लेखकों, सरकारी अधिकारियों, विद्यार्थियों, न्यायपालिका के सदस्यों एवं समस्त स्टेक होल्डरों को आमंत्रित करता है जो एक अभियान बनाकर एक साथ मिलकर देष के प्रत्येक बच्चें को आठ वर्ष की गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक षिक्षा को सुनिष्चित करता है।

चयन जाॅच परीक्षा में सम्मलित होने के लिए अभ्यर्थियों को निम्नलिखित योग्यता एवं शर्ते हैं-

  • यह विधेयक 6-14 वर्ष तक के बच्चों को राज्यों द्वारा अनिवार्य रूप से षिक्षा दिया जाना है इसका अर्थ यह है कि बच्चें द्वारा किताब, पोषाक इत्यादि के लिए एक पैसा भी खर्च नही करना है।

  • शैक्षणिक सत्र के किसी भी समय कोई भी बच्चा विद्यालय जा सकता है और अपने अधिकार का दावा कर सकता है।

  • निजी षिक्षण संस्थानों को 25 प्रतिषत स्थान 2011 से कक्षा 01 में लाभ से वंचित विद्यार्थियों को सुनिष्चित करना पड़ेगा।

  • षिक्षकों के शैक्षणिक योग्यता का सख्त नियम होगा। प्रत्येक स्कूलों में समय सीमा के अन्र्तगत अपराह्न 01ः30 बजे राषन उपलब्ध रहेगा।

  • विद्यालयों को कुछ न्यूनतम सुविधाएॅ यथा प्रर्याप्त षिक्षक, खेल के मैदान एवं मूलभूत संरचना उपलब्ध होना चाहिए। सरकार इस अध्यादेष को लागू कराने हेतु एक तंत्र विकसित करेगी जो निर्मित विद्यालयों को सहायता करेगा। एक नयी अवधारणा है कि पड़ोस में विद्यालय हो। संयुक्त राष्ट्र के समतुल्य माॅडल के हो। राज्य सरकार एवं स्थानीय प्राधिकार द्वारा पड़ोस में 01 कि.मी.के दायरे में पद-चाप दूरी पर प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना की जायेगी।

  • पड़ोस में विद्यालय की एक नयी अवधारणा है जिसे अपनाया गया है। राज्य सरकार एवं स्थानीय प्राधिकार द्वारा 01 कि.मी. की पद चाप दूरी के अन्दर एक प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की जायेगी।अगर बच्चा छः से आठ वर्ग का है तो 03 कि.मी. की पदचाप दूरी पर हो।

  • वित्त रहित एवं निजी विद्यालयों को यह सुनिष्चित करना होगा कि कमजोर वर्ग एवं लाभ से वंचित बच्चों को कक्षा में अलग-अलग नहीं किया जाय और न कोई भेद भाव किया जायेगा।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम - 2009 की मुख्य विशेषताएं

नि: शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के लिए बच्चे के अधिकार को मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं -

  • छह साल की उम्र से 14 के समूह में भारत के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा ।

  • 6 वर्ष आयु वर्ग के ऊपर का बच्चा जिसका नामांकन किसी भी विद्यालय में नहीं किया गया है अथवा जिसकी प्राथमिक षिक्षा पूरी नहीं हुई, उसे वास्तविक उम्र के अनुसार नामांकन किया जायेगा। जिस बच्चे का सीधे तौर पर किसी कक्षा में नामांकन हुआ है उसे भी दूसरे बच्चे की तरह समानान्तर होने के लिए विषेष प्रषिक्षण समय सीमा के अन्दर 14 वर्ष की आयु के उपरांत जब तक प्राथमिक षिक्षा पूरी नहीं होती है, मुफ्््त षिक्षा दिया जायेगा। बच्चें की उम्र का निर्धारण जन्म-मृत्यु, विवाह अधिनियम-1956 के अंतर्गत पंजीकृत प्रमाण पत्र के आधार पर किया जाएगा। उम्र प्रमाण पत्र के अभाव में किसी भी बच्चें का दाखिला से वंचित नहीं किया जाएगा।

  • प्राथमिक षिक्षा प्राप्ति के उपरांत बच्चें का प्रमाण पत्र निर्गत करना है।

  • छात्र-षिक्षक अनुपात को निर्धारित करना।

  • जम्मू एवं कषमीर को छोड़कर यह पूरे भारतवर्ष में मान्य होगा।

  • निजी संस्थानों में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए 25 प्रतिषत आरक्षण व स्थान रखने का प्रावधान है।

  • षिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार।

  • 05 वर्ष के अंदर यदि स्कूली षिक्षक व्यवसायिक योग्यता प्राप्त नहीं करते हंै तो उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।

  • स्कूल की मूलभूत संरचना (जहाॅ कठिनाईयाॅ है वे तीन वर्षों के भीतर पूरा करेंगे अन्यथा उनकी मान्यता समाप्त कर दी जाएगी) अनिवार्य है।

  • वित्तीय बोझ राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा साझा किया जाएगा।